Thursday, 25 June 2026

Story

                                                             कहानी: दो बीजों का निर्णय


एक बार की बात है। एक किसान ने अपने खेत में दो बीज बोए। दोनों बीज एक-दूसरे के बिल्कुल पास थे।

पहला बीज बोला, "मैं जल्दी से अंकुरित होकर ऊपर की दुनिया देखना चाहता हूँ। मैं सूरज की रोशनी महसूस करूँगा, बारिश की बूँदों का आनंद लूँगा और एक बड़ा पेड़ बनूँगा।"

इतना कहकर वह मिट्टी को चीरते हुए बाहर निकल आया। धीरे-धीरे वह एक मजबूत पौधा बन गया।

दूसरा बीज डर गया। उसने सोचा, "अगर मैं बाहर निकला तो कोई मुझे कुचल देगा। तेज़ धूप मुझे जला देगी। बारिश मुझे नुकसान पहुँचा सकती है। बेहतर है कि मैं यहीं सुरक्षित रहूँ।"

वह मिट्टी के अंदर ही पड़ा रहा।

कुछ दिनों बाद एक मुर्गी दाना खोजते हुए वहाँ आई। उसने मिट्टी को कुरेदा और उस दूसरे बीज को खा लिया।

समय बीतता गया। पहला बीज एक विशाल वृक्ष बन गया। उसकी शाखाओं पर पक्षियों ने घोंसले बनाए। राहगीर उसकी छाया में आराम करने लगे। उसके फल लोगों के काम आए। वह सैकड़ों नए बीजों का स्रोत बन गया।

यदि दूसरा बीज भी अपने डर पर विजय पा लेता, तो शायद उसका जीवन भी उतना ही सार्थक होता। लेकिन उसने सुरक्षा को विकास से अधिक महत्व दिया और अपना अवसर खो दिया।

शिक्षा:
डर हमें अस्थायी सुरक्षा तो दे सकता है, लेकिन वह हमारे विकास को रोक देता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए जोखिम उठाना आवश्यक है। जो व्यक्ति चुनौतियों का सामना करने का साहस करता है, वही अपनी वास्तविक क्षमता तक पहुँचता है।





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